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यूपी के एक आश्रम में कोरोना दवा के बहाने शराब पिलाकर बच्चों का यौन उत्पीड़न


उत्तर प्रदेश के मुजफ्फ़नगर जिले में तीर्थ स्थल के नाम से मशहूर शुक्रताल के एक आश्रम से चाइल्डलाइन वेल्फेयर ने छापा मारकर दस बच्चों के मुक्त कराया।

मेडिकल रिपोर्ट में चार बच्चों के साथ यौन शोशण का मामला सामने आया है। पीड़ित बच्चों ने अपने बयान में कथित संत भक्ति भूषण गोविंद महाराज और उसके साथी मोहन दास के घिनौने राज खोले हैं। फिलहाल दोनों पुलिस की गिरफ्त में हैं। दोनों को POCSO ऐक्ट (प्रिवेंशन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) और दुष्कर्म के लिए आईपीसी की धारा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। आश्रम जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट के तहत रजिस्टर्ड भी नहीं है। महाराज सिसौली गांव (मेरठ से 65 किलोमीटर दूर) का रहने वाला है। उसने 12 साल पहले आश्रम की स्थापना की थी।’ उसका पिछला कोई आपराधिक रेकॉर्ड नहीं है।

आश्रम में इन बच्चों से शिक्षा देने के नाम पर मजदूरी कराई जा रही थी। आश्रम में रह रहे मिजोरम के 10 वर्षीय बच्चे ने चाइल्ड वेलफेयर कमिटी को अपने बयान में बताया कि महाराज भक्ति भूषण गोविंद उन्हें कोरोना की दवा कहकर शराब पिलाता था और फिर कपड़े उतारकर लेट जाता। फिर बच्चों को गंदी फिल्में दिखाता और गंदी चीजें करता। वहीं त्रिपुरा के रहने वाले 13 साल के एक लड़के ने बताया कि आश्रम का कुक अक्टूबर 2017 में उसे यहां लाया था। यहां वह गुलामों की तरह रहता था। उससे हर रोज महाराज की मसाज करने और शराब व बीड़ी लाने के लिए कहा जाता था। महाराज उसके साथ गंदा काम करता था।
त्रिपुरा के ही एक 18 वर्ष लड़के ने बताया कि अगर कोई भी बच्चा महाराज द्वारा कही गई किसी भी काम से मना करता तो उसकी पिटाई होती थी। उधर, बच्चों के मां-बाप जो खर्च भेजते थे उस पैसे को भी वही रख लेते थे और उसे आश्रम में ‘रहने का खर्च’ बताया जाता था।कहकर पूरी तरह ले लिया जाता था।

सुशील मानव

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