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परलकोट का बेमिशाल धरोहर नष्ट होने की कगार पर

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पखांजुर । परलकोट जलाशय कृषि एवं पर्यटन की दृष्टि से परलकोट क्षेत्रवासियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है । पखांजुर मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर प्राकृति की गोद में स्थित परलकोट जलाशय जापानी इंजीनियरिंग का एक बेहद उम्दा नमूना है जो परलकोट के कई गाँवों के बंजर भूमियों को सींचकर उपजाऊ बनाती है ।
दण्डकारण्य प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया यह जलाशय पर्यटन की दृष्टि से भी जापानी इंजीनियरों की बेमिशाल कारीगरी है । परंतु आज देखरेख और शासन की उदासीनता के चलते इंजीनियरिंग की यह बेहतरीन कारीगरी नष्ट होने के कगार पर है । जलाशय बनने के आज लगभग 50 वर्ष बाद भी यह आने वाले पर्यटकों के लिए न तो रुकने के लिए व्यवस्था है ना ही सरकार द्वारा पेयजल हेतु एक नल तक नहीं लगाया गया है ।
जलाशय के बाँध की मरम्मत कई वर्षो से नही हुआ है, बांध के पार में कई जगह दरार से लोगो को अब बाँध के टूटने का डर भी सता रहा है । जलाशय निर्माण के समय बने विश्रामगृह और शासकीय आवासों की हालात अब जर्जर हो चुकी है । जलाशय में उद्यानिकी से लेकर वोटिंग के कई बेहतरीन विकल्प है जिसके द्वारा पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। परंतु इस जलाशय को अब तक रंगाई तक नसीब नहीं हुयी है ।


विडम्बना की बात यह है कि जलाशय के रख-रखाव के लिए कोई भी विभाग जिम्मेदारी नहीं ले रहा है , न पी.डब्लू.डी. विभाग,न वनविभाग ,न कृषि विभाग और न ही सिंचाई विभाग कोई भी विभाग इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर और परलकोट के इतिहासिक प्रतीक के रख-रखाव और सौन्दर्यकरण की जिम्मेदारी लेता नज़र आ रहा है । क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो एवं नेताओं का रवैया भी इस ओर बेहद गैरजिम्मेदाराना है ।
शासन की उदासीनता और जनप्रतिनिधियो के उदासीनता के चलते यह बेमिशाल धरोहर कही आने वाले समय में बस इतिहास बनकर ही न रह जाये ।

राजेश हालदार की रिपोर्ट

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