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जब जमीन घोटाले में फंसे राजेश टोप्पो को मुकेश गुप्ता ने बचाया

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राजकुमार सोनी की रिपोर्ट

रायपुर.- भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर राजेश टोप्पो पर गंभीर आर्थिक गड़बड़ी करने के आरोप में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने शुक्रवार को मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन इससे पहले भी टोप्पो आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जद में आ चुके हैं. वर्ष 2012 में उन पर भिलाई की जीई रोड से लगी तीन हजार वर्ग मीटर से बड़ी बेशकीमती जमीन के लैंडयूज को बदलकर लाखों रुपए की गड़बड़ी करने का आरोप लगा था जो बाद में सही पाया गया. बताते हैं कि इस प्रकरण की पूरी छानबीन तब के एडिशनल डीजी दुर्गेश माधव अवस्थी ने की थी. इस मामले में ईओडब्लू की तरफ से चालान पेश करने की कार्रवाई होने ही वाली थीं कि अचानक सुपर सीएम के नाम से विख्यात अफसर ने हस्तक्षेप कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. थोड़े ही दिनों बाद अवस्थी को ईओडब्लू से हटा दिया गया. लंबे समय तक यह मामला फाइलों में बंद रहा. इधर सूत्र बताते हैं कि मुकेश गुप्ता के ईओडब्लू प्रमुख बनते ही मामले का खात्मा कर दिया गया. खबर है कि जिस मामले का खात्मा हो चुका है उसकी फाइल भी अब ईओडब्लू से गायब है.

गौरतलब है कि वर्ष 1993 में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ( साडा ) ने नर्सिग होम के लिए नेहरूनगर पश्चिम इलाके में रहने वाले हरदीप सिंह राजपाल को 432 रुपए प्रति मीटर की दर से लीज पर 3075 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की थी। यह जमीन नर्सिग होम के लिए आरक्षित थी। वर्ष 1997 के इस जमीन का लैंडयूज बदल दिया गया. अफसरों ने अचानक अस्पताल और नर्सिंग होम के लिए आरक्षित जमीन पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दे दी. जिस जमीन पर अस्पताल बनाया जाना था, वहां आज कमर्शियल कांप्लेक्स खड़ा है। यहां निजी बैंक, मोबाइल शो रूम, फाइनेंस कंपनियां, होटल, ज्वेलरी शॉप यहां चल रही हैं। 432 रुपए वर्ग मीटर की दर से खरीदी गई जमीन की वर्तमान दर करीब 14 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर है। इस मामले में अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी जांच में यह पाया था कि साडा और उसके बाद बने नगर पालिका निगम के अधिकारियों ने अपने अधिकारों से परे जाकर जमीन का लैंड यूज बदला और नवीनीकरण की कार्यवाही को अंजाम दिया था. तब राजेश टोप्पो नगर निगम भिलाई के आयुक्त थे और आयुक्त रहने के दौरान ही उन्होंने बिल्डिंग परमिशन को रिन्यू किया था। ब्यूरो ने इस मामले में एचपी किंडो, एसबी सिंह, राजेश सुकुमार टोप्पो, सुधीर किंजवड़ेकर, एसबी शर्मा, यूके अश्वनी चंद्राकर,प्रोसेसर सर्वर और हरदीप सिंह राजपाल सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया था. इस मामले में अब तक किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.अब तो पूरा मामला ही दब गया है. वैसे इस प्रकरण में सबसे ज्यादा हैरत की बात यह है कि जो अफसर एक पड़ताल में दागदार आरोपी था वहीं अफसर उसी प्रकरण में कतिपय रसूखदार लोगों के हस्तक्षेप के चलते पाक-साफ हो गया. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले की फाइल भी फिर से ढूंढी जाएगी और दोषियों के खिलाफ चालान पेश होगा. फिलहाल तो सूत्र यहीं कहते हैं कि फाइल नदारत है.

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