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किसान एवं कृषि विरोधी विधेयक रदद् कराने मैनपुर ब्लॉक के गॉवों में प्रदर्शन

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किरीट ठक्कर।


गरियाबंद। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के देशव्यापी बंद के आह्वान पर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा और आदिवासी भारत महासभा के सदस्यों ने मैनपुर क्षेत्र के गांव जीडार ,कोनारी, बुढार में विरोध प्रदर्शन किया। आदिवासी भारत महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कॉमरेड भोजलाल नेताम ने कहा कि कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) मोदी जी का पहला विधेयक है। किसानों को यह छूट और सुविधा पहले से ही मिली हुई है कि वह अपनी कृषि उपज कहीं भी बेच सकता है । यही सुविधा मोदी जी अब कानूनी रुप से किसानों को देने जा रहे हैं, किन्तु किसानों के नाम पर इसका वास्तविक फायदा सिर्फ व्यापारियों को होगा। इस कानून के बाद व्यापारियों को मंडियों में कृषि उपज की खरीदी करना जरूरी नहीं है क्योंकि जब व्यापारी कृषि उपज को अपने भाव (मूल्य) से घर पहुंचकर लेगा तो मंडियों में ऊंचे दामों में बोली लगाकर क्यों खरीदेगा ?
इतना ही नहीं मंडी से खरीदी करने पर मंडी टैक्स , हमाली खर्च और ट्रांसपोर्टिंग भी लगता है ,लेकिन यह भी सच है कि कृषि उपज मंडी ही बाजार भाव भी तय करता है जिससे किसान को भी यह जानकारी प्राप्त हो जाती है कि उसके कृषि उपज का वर्तमान में बाजार भाव कितना चल रहा है । अब जब इस कानून के बाद व्यापारी मंडियों में खरीदी करने के लिए बाध्य नहीं है तो स्वभाविक है मंडी का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। इसके बाद किसानों को अपने कृषि उपज का बाजार भाव पता करने के लिए जिससे उसको ऊंचा दाम मिल सके अपने कृषि उपज का नमूना लेकर अलग अलग व्यापारी के पास उनके संस्थानों में भटकना पड़ेगा जो न्याय संगत नहीं है।

दूसरा विधेयक , मूल्य आश्वासन और कृषि समझौता

मोदी जी का दूसरा विधेयक है मूल्य आश्वासन एवं कृषि समझौता , इसके अंतर्गत कंपनियों या व्यापारियों द्वारा कृषकों से अनुबंध किया जाएगा कि कौन सी फसल लगाना है और उसका कितना दाम मिलेगा इस अनुबंध के आधार पर किसान फसल का उत्पादन तो कर लेगा , किन्तु यदि किसी कारणवश उक्त कंपनी या व्यापारी द्वारा उक्त कृषि उपज को खरीदने से इंकार कर दिया जाता है तब इस स्थिति में विधेयक पारित करने वाली सरकार किसानों के हित में क्या कदम उठायेगी यह स्पष्ट नहीं है।

तीसरा विधेयक आवश्यक वस्तु अधिनियम :

व्यापारियों को भंडारण की छूट

मोदी जी का तीसरा विधेयक है आवश्यक वस्तु अधिनियम (संशोधन) विधेयक , जिसमें अनाज,आलू,प्याज जैसे अनेक कृषि उपज को लिया गया है। जिसका भंडारण करने की व्यापारियों कोछूट दी जा रही है , जिसका पूरा का पूरा फायदा व्यापारियों को ही मिलेगा इससे किसानों को कोई फायदा होने वाला नहीं है। आज तक के आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इन वस्तुओं का भंडारण करना जमाखोरी कहलाता था परन्तु अब व्यापारियों द्वारा इन वस्तुओं का भंडारण करके अपने हिसाब से बाजार में बेचा जाएगा और सरकार कुछ नहीं कर पायेगी। जिसकी खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भोगना पड़ेगा जो न्याय संगत नहीं है।
मैनपुर के गांव में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान पदम नेताम, युवराज, परमेश्वर, भीमसेन, गौकरण, नोहर नेताम तथा अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे।

किरीट ठक्कर।

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