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कबाड़ की तरह लादकर स्कूलों तक पहुंचाई जा रही है सरस्वती साइकिल योजना की नई साइकिल

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रायपुर ( भूमकाल समाचार )।सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर किस तरह का हश्र है इसे समझने के लिए यहां पर दिए गए चित्र काफी है । ट्रैक्टर में कबाड़ की तरह लदी, एक-दूसरे से उलझी यह नई साइकिलें स्कूली छात्राओं को बांटने के लिए सरकार की योजना के तहत स्कूल पहुंचाई गई है । सरकारी स्कूल की गरीब छात्राओं के लिए चलाई गई इस योजना का यह और मजाक है ।

यह चित्र अभनपुर तहसील के उपरवारा गांव के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है, जहां आज ही इन साइकिलों को फिट करवा कर सप्लायर द्वारा दो ट्रेक्टर में कबाड़ की तरह भरकर लाया गया । सरकार की सरस्वती साइकिल योजना के तहत इन साइकिलों को पात्र स्कूली छात्राओं के घर घर जाकर शिक्षकों द्वारा बांटा जाना है ।सरकारी स्कूलों के छात्राओं को निशुल्क साइकिल का वितरण किए जाने वाले कार्य इस बार कोरोना वायरस के चलते बिना किसी समारोह के ही छात्राओं के पालकों को दिया जा रहा है

ज्ञात हो कि अधिकांश स्कूलों को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया था। इसके चलते इन स्कूलों की छात्राओं को साइकिल नहीं मिल पाई थी। शुरुआत में शिक्षा विभाग ने धड़ाधड़ साइकिल का वितरण कर दिया, जिसके बाद साइकिल कम पड़ गई। इसी बीच लॉकडाउन भी लग गया। इसके चलते कई स्कूलों में साइकिल की सप्लाई नहीं हो पाई। पता चला है कि कंपनी ने जिले के सभी स्कूलों में साइकिल की सप्लाई कर दी है। शिक्षक सूची अनुसार छात्राओं के घर जाकर इसका वितरण करेंगे। वहीं रजिस्टर में साइकिल प्राप्त करने वाली छात्राओं का हस्ताक्षर लेंगे । अब जिस तरह से इन्हें कबाड़ की तरह लादकर ट्रैक्टर में गांव गांव के स्कूलों तक पहुंचाया जा रहा है निश्चित रूप से इन नई साइकिलों में टूट-फूट होगी इसकी जवाबदारी किसकी है ? क्या इन चित्रों को देखकर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी या मंत्री कोई कार्यवाही करेंगे ?

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