Bhumkal Samachar

एक बार फिर सच्चाई ने मुँह पर तमाचा मार दिया।कानून की किताबें सिर्फ गरीबों और बेबसों के लिए खुलती हैं।

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जिन रसूखदारों ने 13-14-15-16 साल की मासूम बच्चियों को अपना शिकार बनाया,
जिन्होंने एपस्टीन की उस गंदी दुनिया में शामिल होकर निर्दोषों की चीखों को दबाया,
जिन बिजनेसमैनों, फिल्म स्टार्स, बड़े-बड़े नेताओं और ताकतवर शख्सियतों ने उस काले जाल में पैसों और शौक की कीमत पर बच्चियों की मासूमियत बेच डाली –

उन पर “आज भी कोई कार्रवाई नहीं होगी।”

यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने साफ कह दिया:
“एपस्टीन फाइल्स में नए खुलासे हों या भयानक तस्वीरें सामने आएँ,
सिर्फ इनके आधार पर हम कोई नया केस नहीं चला सकते।”

मतलब साफ है –
जब तक पैसा, रसूख और कनेक्शन है,
तब तक कानून की नजरें नीची रहेंगी।
जब तक नाम बड़ा है, तब तक अपराध छोटा माना जाएगा।

13 साल की बच्ची जो कभी स्कूल बैग लेकर जाती थी,
वो आज भी कहीं कोने में रो रही है –
और जिन लोगों ने उसकी आँखों की चमक छीन ली,
वो आज भी चमचमाते लिविंग रूम में हँस रहे हैं,
शैंपेन के गिलास लिए, बेफिक्र।

कितनी बार देखेंगे हम ये दोहरा चेहरा?
कितनी बार सहेंगे ये घिनौना सच?

जब तक ताकतवरों के लिए अलग कानून रहेगा,
और कमजोरों के लिए अलग सजा –
तब तक न्याय का मतलब सिर्फ एक मजाक ही रहेगा।

Source – https://rootsalert.com/epstein-files-no-new-cases-elite-untouchable/

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