आतंक का पर्याय माने जाने वाले पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता के खिलाफ आरोप पंजीबद्ध

Mukesh-guptaराजकुमार सोनी की रिपोर्ट

रायपुर. भले ही पन्द्रह विधायकों का मुट्ठी भर विपक्ष कांग्रेस पर बदलापुर की राजनीति करने का आरोप लगा रहा है, लेकिन साजिश रचने वालों के खिलाफ लगातार धमाकेदार तरीके से की जा रही कार्रवाई ने भूपेश बघेल को एक दमदार और जानदार मुख्यमंत्री के रुप में स्थापित कर दिया है. हालांकि राजनीति के चंद अखबारी धुंरधरों, पंड़ितों और दलालों को भाजपाइयों-अफसरों पर की जा रही कार्रवाई नागवार गुजर रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ को लूटतंत्र में बदलने वालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से आम छत्तीसगढ़िया खुश है. सामंती तौर-तरीके से पन्द्रह साल तक राज करने वाली पार्टी के लोग शायद ही कभी यह जान पाएंगे कि देशज का मतलब देशज ही होता है. बहरहाल छत्तीसगढ़ में पुलिसिया आतंक से परेशान होने वाले लोगों के लिए एक खुशखबरी है. खुशखबरी यह है कि आतंक का पर्याय समझे जाने वाले पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने धारा 166, 166 ए ( बी ), 167, 193, 194, 196, 201, 218, 466, 467, 471 और 120 बी के तहत मामला दर्ज कर लिया है. उनके साथ नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह पर भी इन्ही धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है. इन अफसरों पर जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है उसके बाद उनका जेल जाना तय माना जा रहा है. इन दोनों अफसरों पर एफआईआर के बाद सुपर सीएम अमन सिंह पर भी बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है. फिलहाल अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने नागरिक आपूर्ति निगम के प्रकरण की जांच के दौरान झूठा साक्ष्य गढ़ा, आपराधिक साजिश रचते हुए मामले में शामिल रसूखदार लोगों को बचाया और अवैध तरीके से फोन की टैपिंग की.

अमन सिंह पर भी होगी एफआईआर

इधर सूत्रो का दावा है कि रमन सिंह के प्रमुख सचिव रहे अमन कुमार सिंह पर भी जल्द ही एफआईआर दर्ज हो सकती है. फिलहाल तो उनके खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय से राज्य सरकार को जांच के लिए भेजे गए पत्र के आधार पर जांच चल रही है. सरकार ने दिल्ली की निवासी विजया मिश्रा की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है. खुद को देश का सबसे ताकतवर नौकरशाह बताने वाले अमन सिंह पर आरोप है कि उन्होंने आईआरएस से वीआरएस यानि स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने के बाद अपनी संविदा नियुक्ति के दौरान इस तथ्य को छिपाया था कि उनके खिलाफ कभी किसी तरह की कोई जांच लंबित नहीं है. विजया मिश्रा ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में डेपुटेशन से पहले 2001-2002 में जब वे कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट बैंगलुरू में पदस्थ थे तब भ्रष्टाचार के एक मामले में उनके खिलाफ जांच की गई थी. उन्हें सीबीआई जांच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था. सूत्रों का कहना है कि विजया मिश्रा की शिकायत के अलावा सरकार को उनके संबंध में कुछ अन्य सनसनीखेज शिकायतें भी हासिल हुई है. फिलहाल सरकार सभी शिकायतों का परीक्षण करवा रही है.

वीरेंद्र पांड़े की शिकायत पर भी होगी जांच

भाजपा के पूर्व विधायक एवं वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने विवादित पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह के खिलाफ शिकायत दी है. उनकी शिकायत पर भी जांच प्रारंभ हो गई है.पांडे ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री को दस्तावेजों के साथ शिकायत सौंपकर यह जानकारी दी थी कि अगर कोई रिपोर्ट लिखवाना चाहे तो पुलिस रेगुलेशन एक्ट के पैरा 710 और विधि की धारा 154 के तहत प्रथम सूचना दर्ज की जाती है, लेकिन अफसर मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह छत्तीसगढ़ के अफसरों और जनता को फर्जी मुकदमों का भय दिखाकर मामला दर्ज करते थे. पांडे ने कई मामलों के उदाहरण देते हुए कहा कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने अपराध क्रमांक 53/ 2014 में प्रथम इत्तिला सूचना पृष्ठ क्रमांक 30, 31 एवं 32 तथा 34 में दर्ज की है. इसी तरह अपराध क्रमांग 54/ 2014 की प्रथम इत्तिला सूचना पृष्ठ क्रमांक 34, 35, 36 एवं 37 में दर्ज है. अपराध क्रमांक 55/ 2014 की प्रथम सूचना 38, 39, 40 एवं 41 नंबर के पेज में दर्ज है और अपराध क्रमांग 57/ 2014 की सूचना 42, 43, 44 एवं 45 में उल्लेखित है. महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अपराध क्रमांक 56/ 2014 को प्रथम इत्तिला पुस्तक के पेज नंबर 42, 43, 44, 45 में लेख किया जाना था, लेकिन विजय सिंह ठाकुर, गोविंदराम देवांगन, अबरार बेग, बीडीएस नरबरिया जिनके पास से करोड़ों रुपए की संपत्ति जप्त की गई थीं के खिलाफ प्रथम इत्तिला पुस्तक के बजाय कम्प्यूटर में फर्जी एफआईआर दर्ज की गई. जब इन लोगों से रिश्वत प्राप्त कर ली गई और कम्प्यूटर के सादे कागज की फर्जी एफआईआर फाड़ दी गई और एक इंजीनियर आलोक अग्रवाल के खिलाफ प्रथम इत्तिला पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक 43, 44 एवं 45 में लेख कर दिया गया. पांडे का कहना है कि अपराध क्रमांक 5/ 2015 की जानकारी प्रथम इत्तिला पुस्तक में दर्ज नहीं है. इसे कम्प्यूटर में सादे कागज में लेख किया गया है. इंजीनियर आलोक अग्रवाल से मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह ने रिश्वत की मांग की. जब उसने देने से मना कर दिया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई. अबरार बेग, गोविंद राय, विजय सिंह ठाकुर, गोविंदराम देवांगन, बीड़ीएस नरबरिया जैसे लोग जिनके पास से करोड़ों रुपए बरामद हुए थे उनसे रिश्वत लेकर कम्प्यूटर में लिखी गई शिकायत फाड़ दी गई. पांडे ने मुख्यमंत्री को अपने आरोपों की पुष्टि के लिए और भी कई तरह के प्रकरणों के उदाहरण दिए. पांडे ने कहा कि मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह सांठगांठ कर अफसरों और अन्य लोगों के घरों पर छापामार कार्रवाई करते थे. उनकी हर कार्रवाई कानून सम्मत न होकर कूटरचित होती थी।

aman singh

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