सुकमा में फिर फर्जी मुठभेड़ : लकड़ी काटने जंगल गयी महिला को गोली मार दी सीआरपीएफ जवानों ने

रायपुर: बीते शनिवार को सुकमा जिले के पोलमपल्ली थानांतर्गत गोडेलगुड़ा में हुई मुठभेड़ को लेकर बस्तर में तैनात सीआरपीएफ व डीईएफ के जवान एक बार फिर कटघरे में हैं। मुठभेड़ को लेकर गोडेलगुड़ा के ग्रामीणों ने जवानों पर आरोप लगाया है कि न कोई नक्सली था, न कोई मुठभेड़ हुई। बस एक महिला पर तीन गोलियां चली और उसे वर्दी पहनाने की ​कोशिश की। मृतक महिला को वर्दी पहनाने की कोशिश की जवानों ने तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब रविवार को आप नेत्री सोनी सोरी ने अपने 15 सदस्यी जांच टीम के साथ मौके पर पहुंकर ग्रामीणों से बताचीत की। गांव में सोनी सोरी की मुलाकात दो 2 चश्मदीदों से हुई। दोनों ने बताया कि सीआरपीएफ के जवान जिसे मुठभेड़ बता रहे हैं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। जवानों ने गांव में पहुंचकर पोड़ियाम सुक्की पर फायरिंग की। उन्होंने तीन गोलियां चलाई, इसके बाद जवानों ने उसे नक्सली वर्दी पहना दिया, ग्रामीणों ने इसका विरोध किया लेकिन उन्होंने एक न सुनी। जांच के दौरान सोनी सोरी की टीम को मौके पर तीन कुल्हाड़ी भी मिली।

गौरतलब है कि बीते शनिवार को 8.30 बजे जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ होने की जानकारी मिली थी। इस मुठभेड़ में पुलिस ने एक महिला की मौत और एक के घायल होने की पुष्टि की थी। बता दें कि घायल महिला का अभी भी उपचार जारी है।

एसपी जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि शुरुआती पड़ताल में यह बात सामाने आई है कि एनकाउंटर के दौरान दोनों महिलाएं एनकाउंटर स्थल से कुछ ही दूरी पर जंगल में लकड़ियां इकट्ठा कर रहीं थीं। फायरिंग की आवाज सुनकर दोनों हड़बड़ाहट में गोलीबारी की दिशा की तरफ ही भागीं और पोड़ियाम सुक्की के पेट में गोली लगी और वह गिर गई। एक गोली कलमू देवे की जांघ को चीरते हुए निकल गई। बावजूद वह भागते हुए गोदेलगुड़ा पहुंची। यहां से ग्रामीण उसे लेकर पुसवाड़ा कैंप की ओर आ रहे थे। इसी दौरान सुरक्षाबलों के जवानों की नज़र घायल महिला कलमू देवे पर पड़ी और वे उसे उपचार के लिए दोरनापाल लेकर पहुंचे। इससे पहले सुक्की को जवान मुठभेड़ स्थल से निकालकर दोरनापाल ले आए थे, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। देवे का उपचार फिलहाल जिला अस्पताल में जारी है। उसकी हालत सामान्य बनी हुई है 4-5 दिनों में उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

जांच के बाद आप नेत्री सोनी सोरी ने बताया कि मैं किसी राजनीतिक पार्टी से नही बल्कि आदिवासी होने के नाते मामले को जानने गोडेलगुड़ा पहुंची। यहां ग्रामीणों से पता चला कि न तो ये नक्सली थे और न ही कोई मुठभेड़ हुई। ग्रामीणों ने बताया कि सिर्फ 3 ही गोली चली और दो महिला घायल हो गए, जिनमे एक कि मौत भी हो गई। मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्यवाही की जाए।

“मामले पर कवासी लखमा ने कहा कि मुझे इस घटना की जानकारी मिली थी मैं लगातार वहां के नौजवानो से सम्पर्क कर रहा हूं। घटना के बाद जो भी मदद परिवार को दी जा सकती है वो हम देंगे और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच करवाएंगे। यदि इस घटना में कोई दोषी पाया जाता है तो उसपर भी कार्रवाई होगी।

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