रात ग्यारह बजे बस्तर के पुलिस जवान का वो फोन कॉल : तामेश्वर सिन्हा

अभी कुछ दिन पहले मोबाईल की घंटी अचानक भन-भनाई, रात 11 बजे का वक्त था| दुसरे तरफ से आवाज आई सर, मैं थाने से बोल रहा हूँ, मैं सन्न रह गया| मैंने पूछा कौन सा थाना, तभी जियो की मेहरबानी से फोन कट गया|

मैंने दुबारा उस व्यक्ति को फोन किया, एक बार में ही तड़ाक से उसने फोन उठा लिया, और कहने लगा…सर हम लोग के ऊपर खूब अन्याय होता है, हम लोग का खूब शोषण किया जा रहा है आप देखो न सर…

लड़खड़ाती आवाज में मैंने बोला जी आप कौन बोल रहे है? तभी उसने जवाब दिया मैं सर पुलिस का जवान बोल रहा हूँ… उसके इस बात को सुनकर मैं चौंका गया ..मैंने पूछा आप पर क्या अत्याचार हो गया? जवान ने तड़ाक से कहा सर हमारे अधिकारी हम लोगों का शोषण करते है, घर के काम में हमारा इस्तेमाल करते है, हमें मजदुर बना दिए है, एक दिन विरोध किए तो अफसर बोला साला ऐसा जगह ट्रांसफर करूँगा अपने बीवी बच्चों का शकल नही देख पायेगा|

वह व्यक्ति इस तरह अचानक फोन करके मेरे दिलों दिमाग को झकझोर रहा था, मैंने भी पूछ लिया किस जगह में हो भाई आप ? क्या नाम है ? उसकी जबान लड़खड़ाने लगी| मैंने बोला चलो छोड़ो, बताओ क्या हुआ था आपके साथ? उसने बोला सर मैंने आपका नम्बर एक साथी से लिया है| उसने बोला था की आप से या प्रभात सिंह जो पत्रकार है उनसे बात कर लेना लेकिन उसका नंबर नही लग रहा है तो आप को लगाया हूँ |

मैंने फिर पूछा हाँ बताओ तो सही पूरा माजरा आखिर क्या हुआ ?

मेरे दिलासे के बाद उसका डर खत्म हुआ और फिर उसने अपने अधिकारियो द्वारा दमन की सारी हदें पार कर देने वाले किस्से को बयां किया |

उसने बोला सर मेरा (फलाना) जगह पोस्टिंग था, वहाँ हमारे अफसर हम लोग से बिल्डिंग बनवाते थे, दिन रात हम लोगों से लेबर का काम करवाते थे, ईटा, गारा बनवाने का काम करते थे| एक दिन सभी लोगों ने मिलकर विरोध किया| इस बात की खबर कहीं से मीडिया वालो को लग गया | दुसरे दिन छाप दिए सर, फिर क्या था अफसर ने हम लोगो को बुलाया|  खूब गाली बका सर, बोला बहुत नेतागिरी करने का शौक है| ऐसे जगह फेकावाऊंगा की माँ-बाप बीवी बच्चे किसी का शक्ल नही देख पाओगे और दुसरे ही दिन हमारा ट्रांसफर आर्डर आ गया और अभी हम (फालना) जगह में है सर| यहाँ भी हमारे ऊपर खूब दबाव बना के रखते है सर|

मैंने बोला ट्रांसफर तो रूटीन प्रक्रिया है, तो कहने लगा, नहीं सर हम लोगों से लेबर का काम करवाते थे | विरोध किये तो ट्रांसफर कर दिए, ठीक है सर ट्रांसफर किए लेकिन दबाव क्यों बना के रख रहे है, ऐसा लग रह है हम लोग को पिंजरे में बंद कर के रखे है|

अब ये सवाल तो उससे पूछना बहुत जरुरी था…मैंने बोला पुलिस वाले क्या आदिवासियों को मारते है? उसने बोला सर रहने दीजिए आप सब जानते है… उसके बाद भी पूछ रहे है ?

मैंने उसका घर पूछा…कहा से हो आप भैया? इतने देर चले वार्तालाप के बाद वह बिना हिचके बोलने लगा… उसने कहा बस्तर के (फलाना) गाँव से हूँ सर ..कितने दिन से घर नहीं गए ? जवाब बहुत चौंकाने वाला था डेढ़ साल हो गए सर घर नहीं गया हूँ| ..क्यों? बाकियों को जाने देते है मेरे को ही जाने नही देते मैंने अपने अफसरों का विरोध जो कर दिया था|

उसने अपने अफसरों के दमन का पिटारा खोला…और फिर सीधा मुझसे पूछा…आप कुछ कर पाओगे की नहीं सर?

मैं क्या कर सकता हूँ यार…उसने बोला मैं सामने नही आऊंगा सर…मेरे परिवार में मैं ही नौकरी में हूँ, मेरे को निकाल देंगे मेरा परिवार खायेगा क्या?

मैंने बोला कोई सामने नहीं आएगा तो मैं लिखूंगा कैसे? नही सर वो आप जानो मैंने मदद माँगा है, प्लीज़ आप हमारी मदद करो ?

इससे पहले मैं सवाल किए जा रह था लेकिन उसके एक सवाल ने मेरी पूरी होशियारी निकाल दी| मैं अपने आप को नकारा महसूस करने लगा था …मेरे पास जवाब नहीं था| मैंने कहा देखता हूँ जैसा भी बनता है, मैं और बात करना चाह रहा था, तभी उसने बोला सर रखता हूँ और उसने तड़ाक से फोन काट दिया…

आँकड़ों के साथ भी पढ़े…

हाल के सालो में जवानों के आत्महत्या के आँकड़ो में तेजी आई है, सवाल उठने लगा है कि आखिर ड्यूटी पर तैनात जवान क्यों आत्महत्या कर रहे हैं? विदित हो कि किसी भी जवान के आत्महत्या के बाद उसके साथी बताते है कि वह मानसिक रूप से परेशान था|

आखिर ड्यूटी में वह मानसिक रूप से परेशान क्यों होता है ? पिछले एक सालो में एक दर्जन से भी ज्यादा जवानो ने ड्यूटी के दौरान आत्महत्या की है और सभी आत्महत्या के कारण ज्ञात हैं, आत्महत्या के बढ़ते आंकड़े को लेकर कई बार पुलिस  मुख्यालय में हलचल देखी गई लेकिन कुछ समय बाद सब ज्यों का त्यों हो जाता है|

पुलिस जवानों से चर्चा में यह बात सामबे आई कि ज्यादातर जवान ड्यूटी में मानसिक तानव में रहते है| वह बताते है जवान उच्च अफसरों की प्रताड़ना के कारण भी काफी दबाव महसूस करते है| पारिवारिक वजह भी आत्महत्या का कारण होती है |

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों में आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी से पनप रही है बस्तर, जगदलपुर, सुकमा,  दंतेवाड़ा और नारायणपुर में तैनात जवान बड़ी तेजी से खुद को गोली मार रहे हैं।

जानकरी के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी गृह मंत्रालय को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर नोटिस जारी कर चुका है| गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में हर 03 दिन में एक जवान आत्महत्या कर रहे है|जानकारी हो कि छत्तीसगढ़ के बस्तर  में  लगभग  25  नागरिक  पर  एक  हथियार बंद जवान तैनात है| 30 लाख की आबादी पर सशस्त्र बल के 80 हजार जवान तैनात है|

एक जानकरी के अनुसार सबसे ज्यादा आत्महत्या के आंकड़े  CRPF के जवानो के है उल्लेखनीय है कि Central Armed Police Forces personnel (CAPF) में सबसे ज्यादा आत्महत्या CRPF के जवान करते हैं| पिछले चार सालों में पूरे देश में CRPF में 137 आत्महत्या, ITBP में 12 आत्महत्या, SSB में 26 आत्महत्या, CISF में 50 आत्महत्या और AR में 32 आत्महत्या के मामले सामने आये हैं|

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